Thursday, April 7, 2011

अपनी निपुणता को समझिए


आप जिस चीज की शुरूआत करने जा रहे हैं, उसके प्रति पहले विश्वास पैदा करें। क्योंकि विश्वास के बिना आपके लिए उसका अस्तित्व ही नहीं रहेगा।
विश्वास करना सफल पुरूषों का एक ब़डा गुण है। वे उस चीज को अपनी कसौटी पर परखते हैं और उससे जो नतीजा निकलता है, उसके आधार पर आगे बढ़ते हुए पूरी ऊर्जा के साथ उसे पाते हैं। हम में से ज्यादातर लोग उस हाथी के समान हैं, जिसका मालिक उसे एक पतली सी जंजीर से बांध कर रखता है जो उस विशालकाय जानवर के लिए तो़डना बहुत ही आसान हो सकता है। लेकिन वह ऎसा करता नहीं, क्योंकि उसका बचपन से ही दृढ़ नजरिया है कि उसका मालिक उसे जिस जंजीर से बांध रहा है, वह जंजीर उससे अधिक मजबूत है। यहीं से फर्क पैदा होता है और वह हाथी इस बारे में सोचना ही बंद कर देता है कि मैं इस जंजीर को तो़ड भी सकता हूं।
ज्यादातर लोग इसी सोच का शिकार होते हैं और पूरी जिंदगी इसी तरह से गुजार देते हैं कि उपलब्धियों को हासिल कर पाना हमारे बस में नहीं है। सफलता के लिए सबसे पहले आपको स्वयं पर विश्वास करना होगा कि आप ऎसा कर सकते हैं। जब मैंने अपने अनुभवों को लिखने के बारे में सोचा तो मेरे दिमाग में आया कि इसके लिए तो बहुत ज्यादा रचनाशीलता की जरूरत होगी।
आpर्यजनक रूप से मैंने अपना डॉक्टरेट रचनाशीलता में ही किया, जिसका विषय था- "टोरेंस टेस्ट ऑफ क्रिएटिविटी।" मैं रचनाशीलता के हर मानदंड को जानता था, फिर भी मुझे डर था कि कहीं मेरे आकलन के मुताबिक परिणाम नहीं मिला तो क्या होगा और इसी बात से मैं निराश हो जाता था। मैंने अपने पिछले कार्य से इस्तीफा देकर केवल लिखने का फैसला किया। आपको विश्वास नहीं होगा कि मैंने बाजार में उपलब्ध इस विषय पर हर किताब खरीदी और पढ़ने के बाद मुझे लगा कि इस किताब के लेखकों में जो योग्यताएं हैं, वह मुझमें नहीं हो सकतीं। लेकिन फिर भी मैंने लिखने का साहस जुटाया। ऎसा एकाएक या रातोंरात मुमकिन नहीं हुआ। मैंने एक लैपटॉप खरीदा और मैं इस किताब को लिखने में व्यस्त हो गया।
पहली किताब लिखने में मुझे छह महीने का वक्त लगा, जिसका नाम है "व्हाट इफ यू डाइ टुमॉरो"। फिर प्रश्न उठा कि इसे कौन छापेगाक् मैंने तकरीबन 15 प्रकाशकों को पत्र लिखा। इनमें से ज्यादातर ने अस्वीकार कर दिया। लेकिन एक ने कुछ रूचि दिखाई। मुझे स्क्रिप्ट जमा करने के लिए कहा गया। प्रकाशक ने 6 महीने तक इंतजार कराया और हर बार फोन पर यही जवाब मिलता कि इस महीने काम हो जाएगा। इस तरह यह किताब फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेला और कोलकाता पुस्तक मेले में नहीं आ पाई और इसी बीच वहां से भी इंकार कर दिया गया। कहा यह गया कि इसमें बहुत-सी व्याकरण की गलतियां हैं। अगले छह महीने के दौरान मैं दूसरी किताब "क्रैक द शेल दैट कवर्स यू" लिखता रहा। छपने से इंकार कर देना मेरे लिए दु:खद था, पर मैं रूका नहीं।
इसी दौरान एक प्रकाशक ने मुझे प्रस्ताव भेजा कि मैं आपकी किताब छाप सकता हूं, बशर्ते भविष्य में आप जो भी लिखेंगे वह किताब मेरे यहां ही छपवाएंगे। मेरे लिए यह एक ब़डा अवसर साबित हुआ और तब से मैं पीछे नहीं मु़डा। उपरोक्त दोनों शीर्षक वाली किताबें उसी प्रकाशक ने छापीं और "सक्सेस इज नॉट बाई चांस" दूसरे प्रकाशन द्वारा छापी गई जो इसे हिंदी में प्रकाशित कराने के लिए इसका हिंदी अनुवाद कराना चाहते थे। साथ ही पूर्व की दोनों किताबों का अनुवाद भी छापा गया। पिछले तीन सालों के दौरान यह मेरी चौथी किताब है। मुझे कई तरह से प्रेरणा मिली, जिससे मैं आगे बढ़ता रहा। जो लोग प्रशासकीय तरीकों के आलोचक थे, वे लोग भी आpर्यचकित थे कि मैंने ऎसा कर दिया। मैंने भी आलोचनाओं का मुकाबला किया है। इस विषय पर ढेर सारी किताबें लिखी गई हैं। लेकिन मैं उनके मिश्रित विचारों के आधार पर कुछ नया लिखना चाहता था।
विभिन्न विश्वविद्यालयों में मेरे अंग्रेजी के प्रोफेसर मित्रों ने भी अपने कमेंट्स भेजे थे। लेकिन अगर 80 प्रतिशत लोग भी मेरे लेखन की सराहना करते हैं तो मैं अपनी लेखन योग्यता से संतुष्ट हो पाऊंगा और मैं समझूंगा कि मेरा कार्य सफल रहा। अक्सर ऎसा होता है कि हम अपनी प्रतिभा से वाकिफ नहीं होते, लेकिन एक बार वह धरातल पर उतर जाए तो आप विजेता बन जाते हैं, केवल धन अर्जन करना ही सफलता का पैमाना नहीं है। ज्यादातर सफल लोगों ने धन और प्रतिष्ठा दोनो अर्जित की हैं। आपकी प्रतिभा ही आपकी पूंजी है और अपनी प्रतिभा को साबित करके आप खुद में दृढ़ विश्वास पैदा कर सकते हैं। आप सबकुछ कर सकते हैं पर साथ ही आपको यह भी याद रखना होगा कि आप क्या कर रहे हैं। पहले कुछ चीजों से शुरूआत करें फिर सारी चीजें एकसाथ अपने-आप शुरू हो जाएंगी। यह प्रकृति का नियम है जिसे आपको खुद में समझना होगा। लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं, मुद्दा यह नहीं है, बल्कि मुद्दा यह है कि आप अपने बारे में क्या सोचते हैं।
आपके विचार ही आपको दूसरों से पृथक करते हैं। एक बार आपका खुद पर यकीन पक्का हो गया तो आप कोई भी चमत्कार कर सकते हैं। कमजोर लोग खुद के लिए काम का आकलन दूसरों से करवाते हैं, जिन्होंने खुद कभी उस तरह के काम को करने का प्रयास नहीं किया है। आप स्वयं की इ”ात करना सीखें। मेरे मामले में ही देखिए कि कोई प्रकाशक नहीं मिल रहा था। यदि मेरी किताब प्रकाशित नहीं होती, तो मेरे पास खोने के लिए क्या थाक् महज किया हुआ परिश्रम। फिर भी मैं संतुष्ट होता कि मैंने अपने मन के मुताबिक कुछ लिखा। वह संतुष्टि इसके किताब रूप में न छपने से कम नहीं होती। सबसे पहले यहां की संतुष्टि का होना जरूरी है।
बाकी सारी चीजें द्वितीयक हैं। मैं दृढ़ता से अपने किए कार्य पर आगे बढ़ता रहा और मुझे इसमें सफलता मिली। मैं नहीं चाहता कि आपके साथ ही ऎसा हो, इसलिए अपने समक्ष मिली चुनौतियों का डटकर मुकाबला कीजिए। आप एक जन्मजात विजेता हैं और उसी के अनुरूप अपना व्यवहार रखिए। एक बार अगर आप दृढ़ हो गए तो फिर कोई आपको रोक नहीं सकता।
कमजोर व्यक्तित्व वाले ही अपने विचारों में विभिन्नता लाते हैं और सोचते हैं कि इस कार्य का परिणाम सकारात्मक होगा या नहीं। हमें किसी कार्य में सफलता प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया के दौरान खुद के विश्वास पर दृढ़ रहना होगा।
(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली से प्रकाशित पुस्तक "खुद बदलें अपनी किस्मत" से साभार)

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