Thursday, April 7, 2011

बेहतर जिंदगी के लिए चाहिए सिर्फ लगन


कई बार हम बहुत जल्दी थक जाते हैं और ध्ौर्य खो देते हैं। दिमाग विचलित होता रहता है और हम परिवार एवं मित्रों से दूर होने लगते हैं। इस तनाव से गुजरते हुए एक समय आता है जब ऎसा महसूस होता है कि जीने का कोई मतलब नहीं है।
इसका एक और कारण है कि हम दुनिया भर के नैतिक, सामाजिक एवं राजनीतिक मुद्दों के बोझ अपने सिर पर डाल लेते हैं। नि:स्वार्थी होना एवं दूसरों की मदद करना अच्छी बात है, साथ ही साथ इस बात का भी ध्यान रखें कि ये चीजें आप अपनी आवश्यकताओं, वादों, जीवन, काम तथा अपने आपके मूल्य पर तो नहीं कर रहे हैंक् मानवीय कार्य वास्तव में शानदार होते हैं। मगर अपने आप से जरूर पूछिए कि ये चीजें आप अपनी आवश्यकता के मूल्य पर तो नहीं कर रहे हैं। जीवन में समय एवं ऊर्जा की उपलब्धता सीमित है। आप जो चाहते हैं वह यदि नहीं कर पाते हैं तो यह आपके जीवन में निराशा एवं असंतोष लाएगा। यह आपका स्वास्थ्य भी बिग़ाड सकता है। बेहतर स्वास्थ्य के बिना आप न अपने काम कर सकते हैं न दूसरों के। मेरी राय में दूसरों की इच्छाओं से पहले अपनी आवश्यकताओं को प्राथमिकता देना कोई बुरी बात नहीं है।
यदि आपको लगता है कि केवल दूसरों को खुश करने के लिए "हां" बोलने के कारण "ना" कहना आपके लिए हितकारी है तो "ना" ही बोलें। साथ ही साथ दूसरों की आवश्यकताओं के लिए आपके पास समय है तो आप उसको जरूर करें। मेरा अनुभव है कि लोग अपनी आवश्यकताओं, इच्छाओं और अपने आप पर ज्यादा केंद्रित रहते हैं। दुर्भाग्यवश या सौभाग्यवश दुनिया की यही रीत है। साधारणत: लोग अपने आप को हर चीज से ऊपर रखते हैं। देशों के बीच ल़डाइयां होती हैं, लोग दूसरों की हत्या करते हैं, व्यापारी धोखीध़डी करते हैं और लोग तलाक या दूसरी शादी अपनी आवश्यकताओं एवं इच्छाओं को पूर्ण करने के लिए करते हैं। स्वार्थ दूसरों की सहायता न करने का व्यवहार नहीं है। दूसरी तरह से देखें तो दूसरों के लिए यदि आप अपने जीवन एवं समय का कुछ भाग खर्च कर सके तो यह एक अच्छी बात है। अपने जीवन में शारीरिक एवं भावनात्मक दोनों पक्षों का संतुलन बनाए रखना काफी अहम है, जिससे कि आप घबराहट, डर जैसी चीजों से कैसे दूर रहें।
चिंताएं हमारी सारी मानसिक एवं भावनात्मक ऊर्जा को सोख लेती हैं और हम अपने आप में भावना रहित महसूस करते हैं। इसका समाधान यही है कि उन तमाम चीजों को त्याग दें जो आपके जीवन एवं समय में दखलअंदाजी करते हैं। यदि कोई अभद्र व्यवहार या बात करता है तो आप उसे सुनने या उसके साथ रहने के लिए बाध्य नहीं हैं। ऎसी मुश्किल का सीधे-सीधे मुकाबला करें। ऎसी स्थिति से बाहर निकल आएं। ऎसी हर चीज वह आपके बारे में या आपसे कही गई हो, का जवाब देने में अपना समय न गवाएं। हमेशा स्वयं की तरह बने रहने का प्रयास करें। कोई कितना भी आकर्षक लगे, उसकी नकल न करें। नकल समस्याओं का समाधान नहीं है। ये केवल आपके जीवन को तितर-बितर करते हैं। दुनिया भर की समस्याओं को हल करने का प्रयास न करें। आपके लिए जो सबसे महत्वपूर्ण है, उसे करते हैं तो यही काफी है। दूसरों के बोझ के बगैर भी जीवन अपने आप में कठिन है। यह हमारी सभी की जिम्मेवारी है कि अपने जीवन के बारे में सोचें और देखभाल सही ढंग से करें। ध्यान रखें कि ब्रह्मांड का केवल एक ही कोना है जिसके प्रति आप निश्चय कर सकते हैं जो कि आप स्वयं और आपका जीवन है।
हर किसी को अपना काम बगैर किसी पर निर्भर हुए करना होता है। अपने आपसे कभी समझौता न करें। अपने स्थान को पवित्र मानें जो कि एक मात्र आपका स्थान है, जहां आप स्वयं को खोज सकते हैं। एक बात दिमाग में हमेशा रखें कि लोग जो कहते हैं, जो करते हैं और क्यों करते हैं ये चीजें बिल्कुल भिन्न होती हैं। गुणवत्ता, श्रेष्ठता एवं उदारता के साथ अपनी गरिमा का ध्यान रखते हुए कार्य करें। यह हम सभी के अधिकार में है। हम सभी अपने जीवन का ख्याल रखें एवं दूसरों को इसे बिग़ाडने का अधिकार न दें।
लगन के साथ प्रतिदिन अपना श्रेष्ठ देने का प्रयास करें। यदि आपके पास लगन है तो किसी और चीज की आवश्यकता नहीं है। यदि आपके पास लगन नहीं है तो कोई और चीज आपकी मदद नहीं कर सकती है।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक "पहले लक्ष्य तय करें" से साभार)

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