दुनिया में हर आदमी का शरीर एक ही तरह से बना हुआ है, जिसमें एक समान रक्त और न्यूरॉन्स की संख्या है लेकिन हमारी क्षमताएं एक समान नहीं हैं। न केवल क्षमता बल्कि हर व्यक्ति का कार्य करने का तरीका भी अलग-अलग है।
ऎसा क्यों होता है ज्यादातर लोग कैसे भी हों काम को निबटाना चाहते हैं। हम कार्य की गुणवत्ता को भूल जाते हैं, जिससे हम उसे महज सामान्य तरीके से ही कर पाते हैं। श्रेष्ठता की कोई खास परिभाषा नहीं है और अगर एक बार कोई श्रेष्ठता हो जाती है तो जरूरी नहीं कि वह हमेशा ही कायम रहे।
समय के साथ श्रेष्ठता की परिभाषा भी बदल जाती है। प्रचलित शिक्षा पद्वति के साथ सूचना तकनीक ने बहुत-सी चीजों को बदल दिया है। समय आज बदल रहा है। पहले जानकारी हासिल करने का जरिया केवल शिक्षक ही थे पर आज इंटरनेट के जमाने में शिक्षक भी श्रेष्ठता रखने के लिए रोज जानकारी देने में पिछ़ड सकते हैं। हर क्षेत्र में श्रेष्ठता के मानदंड बदल रहे हैं, यहां तक कि सरकार ने भी धनी लोगों की परिभाषा बदल दी है। नब्बे के दशक में मैनेजमेंट की डिग्री हासिल किए हुए इंजीनियरिंग के छात्रों की बहुत ज्यादा मांग थी लेकिन अब वह बात नहीं रही। इसका मतलब यह नहीं कि उनकी वैल्यू कम हो गई है लेकिन समाज की मांग में परिवर्तन आ गया है। विजेता बनने के लिए जरूरी है कि जो आप कर रहे हैं उसे पूरी श्रेष्ठता से करें और उसमें अपना विश्वास कायम रखें। सफलता कोई अंतरिम प्रक्रिया नहीं बल्कि इसकी सीमाएं बदलती रहती हैं। सफल लोग श्रेष्ठता से काम करते हैं और वे इस सिद्धांत में विश्वास रखते हैं कि सामान्य लोगों और स्वयं के बीच अंतर पैदा कर देंगे लेकिन वे अपने काम और स्वयं का संपूर्ण आकलन करके आगे बढ़ते हैं।
भारत में एक ब़डे कारपोरेट हाउस के साथ काम करते हुए अक्सर कहा जाता था कि हमें अपनी 90 साल पुरानी शिक्षा पद्धति में ज्यादा फेरबदल करने की जरूरत नहीं। जरूरत इस बात की है कि समाज में हो रहे परिवर्तन के मुताबिक ही हमें उसके नजरिए में बदलाव लाना होगा। यह एक चुनौतीपूर्ण काम है जिसके बहुत सारे आलोचक भी हैं, पर मुझे खुशी है कि इसमें कुछ सुधार हो रहा है। संस्थान के मुखिया मुझसे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मुझे प्रेरित करते हुए कुछ नए प्रोजेक्ट्स दिए, ताकि मैं शिक्षा पद्धति के बारे में अपनी उपयोगिता साबित कर सकूं। मैं यह नहीं कह सकता कि पूरी तरह से बदलाव आ चुका है, लेकिन परिवर्तन महसूस किया जा रहा है। कई बार छोटे बदलाव भी संतुष्टि प्रदान करते हैं, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कार्य की श्रेष्ठता को किसी भी सूरत में कायम रखना है। समय के साथ श्रेष्ठता बनाए रखने में कई बार तनाव भी झेलना प़डता है। लेकिन आपको याद रखना होगा कि विश्वास के सहारे ही आप यहां तक पहुंचे हैं।
अगर यहां कोई दूसरा होता तो असफल हो सकता था। अगर आप श्रेष्ठता को भुला रहे हैं तो समझिए कि आप अपनी पहचान खोने की तैयारी कर रहे हैं। अपने कार्य की श्रेष्ठता से आप कभी भी समझौता न करें। इसे समझने का बेहतर तरीका है कि आप यह जानें कि किसी कार्य की गुणवत्ता और श्रेष्ठता आपस में एक-दूसरे के पर्यायवाची हैं। अपना काम इस तरह से करें कि वह जगह छो़डने के बाद भी आप के कार्य की छाप वहां बरकरार रहे। क्योंकि सिस्टम चलता रहता है, परंतु आपके व्यक्तित्व की पहचान कायम रहती है। एकबार आपको एहसास हो गया कि आपने ऎसा कर लिया है तो समझ जाइए कि आप सफल व्यक्तियों की सूची में जु़ड गए। कार्य करने का आनंद उसकी श्रेष्ठता में ही छिपा होता है। सफलता की जांच लिटमस पेपर की तरह नहीं हो सकती, जहां रंगों में परिवर्तन के माध्यम से बदलाव महसूस होता है, बल्कि यह एक अनुभूति है जो आपमें इसकी गंभीरता की समझ पैदा करती है। श्रेष्ठ कार्य करने के लिए यह जरूरी है कि आपमें श्रेष्ठ विचार पैदा हों और ये श्रेष्ठ विचार ही आपको हमेशा सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं। हमेशा सकारात्मक सोचने की आदत डालें। आप अपनी नियति के मालिक स्वयं हैं, इसलिए आपको कभी भी श्रेष्ठता के साथ समझौता नहीं करना चाहिए।
ऎसा क्यों होता है ज्यादातर लोग कैसे भी हों काम को निबटाना चाहते हैं। हम कार्य की गुणवत्ता को भूल जाते हैं, जिससे हम उसे महज सामान्य तरीके से ही कर पाते हैं। श्रेष्ठता की कोई खास परिभाषा नहीं है और अगर एक बार कोई श्रेष्ठता हो जाती है तो जरूरी नहीं कि वह हमेशा ही कायम रहे।
समय के साथ श्रेष्ठता की परिभाषा भी बदल जाती है। प्रचलित शिक्षा पद्वति के साथ सूचना तकनीक ने बहुत-सी चीजों को बदल दिया है। समय आज बदल रहा है। पहले जानकारी हासिल करने का जरिया केवल शिक्षक ही थे पर आज इंटरनेट के जमाने में शिक्षक भी श्रेष्ठता रखने के लिए रोज जानकारी देने में पिछ़ड सकते हैं। हर क्षेत्र में श्रेष्ठता के मानदंड बदल रहे हैं, यहां तक कि सरकार ने भी धनी लोगों की परिभाषा बदल दी है। नब्बे के दशक में मैनेजमेंट की डिग्री हासिल किए हुए इंजीनियरिंग के छात्रों की बहुत ज्यादा मांग थी लेकिन अब वह बात नहीं रही। इसका मतलब यह नहीं कि उनकी वैल्यू कम हो गई है लेकिन समाज की मांग में परिवर्तन आ गया है। विजेता बनने के लिए जरूरी है कि जो आप कर रहे हैं उसे पूरी श्रेष्ठता से करें और उसमें अपना विश्वास कायम रखें। सफलता कोई अंतरिम प्रक्रिया नहीं बल्कि इसकी सीमाएं बदलती रहती हैं। सफल लोग श्रेष्ठता से काम करते हैं और वे इस सिद्धांत में विश्वास रखते हैं कि सामान्य लोगों और स्वयं के बीच अंतर पैदा कर देंगे लेकिन वे अपने काम और स्वयं का संपूर्ण आकलन करके आगे बढ़ते हैं।
भारत में एक ब़डे कारपोरेट हाउस के साथ काम करते हुए अक्सर कहा जाता था कि हमें अपनी 90 साल पुरानी शिक्षा पद्धति में ज्यादा फेरबदल करने की जरूरत नहीं। जरूरत इस बात की है कि समाज में हो रहे परिवर्तन के मुताबिक ही हमें उसके नजरिए में बदलाव लाना होगा। यह एक चुनौतीपूर्ण काम है जिसके बहुत सारे आलोचक भी हैं, पर मुझे खुशी है कि इसमें कुछ सुधार हो रहा है। संस्थान के मुखिया मुझसे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मुझे प्रेरित करते हुए कुछ नए प्रोजेक्ट्स दिए, ताकि मैं शिक्षा पद्धति के बारे में अपनी उपयोगिता साबित कर सकूं। मैं यह नहीं कह सकता कि पूरी तरह से बदलाव आ चुका है, लेकिन परिवर्तन महसूस किया जा रहा है। कई बार छोटे बदलाव भी संतुष्टि प्रदान करते हैं, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कार्य की श्रेष्ठता को किसी भी सूरत में कायम रखना है। समय के साथ श्रेष्ठता बनाए रखने में कई बार तनाव भी झेलना प़डता है। लेकिन आपको याद रखना होगा कि विश्वास के सहारे ही आप यहां तक पहुंचे हैं।
अगर यहां कोई दूसरा होता तो असफल हो सकता था। अगर आप श्रेष्ठता को भुला रहे हैं तो समझिए कि आप अपनी पहचान खोने की तैयारी कर रहे हैं। अपने कार्य की श्रेष्ठता से आप कभी भी समझौता न करें। इसे समझने का बेहतर तरीका है कि आप यह जानें कि किसी कार्य की गुणवत्ता और श्रेष्ठता आपस में एक-दूसरे के पर्यायवाची हैं। अपना काम इस तरह से करें कि वह जगह छो़डने के बाद भी आप के कार्य की छाप वहां बरकरार रहे। क्योंकि सिस्टम चलता रहता है, परंतु आपके व्यक्तित्व की पहचान कायम रहती है। एकबार आपको एहसास हो गया कि आपने ऎसा कर लिया है तो समझ जाइए कि आप सफल व्यक्तियों की सूची में जु़ड गए। कार्य करने का आनंद उसकी श्रेष्ठता में ही छिपा होता है। सफलता की जांच लिटमस पेपर की तरह नहीं हो सकती, जहां रंगों में परिवर्तन के माध्यम से बदलाव महसूस होता है, बल्कि यह एक अनुभूति है जो आपमें इसकी गंभीरता की समझ पैदा करती है। श्रेष्ठ कार्य करने के लिए यह जरूरी है कि आपमें श्रेष्ठ विचार पैदा हों और ये श्रेष्ठ विचार ही आपको हमेशा सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं। हमेशा सकारात्मक सोचने की आदत डालें। आप अपनी नियति के मालिक स्वयं हैं, इसलिए आपको कभी भी श्रेष्ठता के साथ समझौता नहीं करना चाहिए।
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