Thursday, April 7, 2011

आगे बढ़ना है तो पिछ़डने से मत डरिए

आप जैसा विचार रखते हैं, वैसा ही बन जाते हैं। क्या यह सच्चााई नहीं हैक् आपकी सोच आपकी नियति को तय करती है, यह आपकी सोच का ही नतीजा होती है।
आप अपनी सोच से ज्यादा विकास नहीं कर सकते और न ही आप उससे ज्यादा कुछ हासिल कर सकते हैं। केवल लाटरी का मामला अपवाद हो सकता है। लोग अपने आस-पास की चीजों के मुताबिक ही चीजों को खोजने में विश्वास रखते हैं। कोई प्राचीन स्मारक अपने वर्षो पुराने अस्तित्व को कायम रखने के कारण पर्यटकों का चहेता बना रहता है। उस ढांचे को बनाने वाले ने पहले इसका सपना बुना होगा। फिर इसका डिजाइन तैयार करके काम में हाथ लगाया होगा। सामान्य तौर पर आदमी किसी नई चीज को शुरू करने-भर से ही डरता है और यही वजह है कि मानसिक रूप से विकलांग व्यक्ति कुछ भी प्रयोग करने से नहीं हिचकिचाता है। आपके महान दृष्टिकोणों का परिणाम ही आपको ब़डे कार्यो की ओर ले जाता है। अपनी सोच के मुताबिक ही हम अपने नजरिए को आकार देते हैं।
हमें बचपन से ही सिखाया जाता है कि अंधेरा दुष्टात्माओं का प्रतीक है, जिससे हमें भय लगने लगता है, लेकिन जब हम इस तथ्य को समझ जाते हैं कि अंधेरा कुछ नहीं, बल्कि प्रकाश की अनुपस्थिति की वजह से होता है तो सारा डर गायब हो जाता है। यह तो महज एक उदाहरण है, वरना हमने अपना नजरिया कुछ ऎसा बना लिया है कि हम डरते ज्यादा हैं। क्या आपने किसी शिशु को मोमबत्ती की लौ छूते हुए देखा है और फिर उसके बाद उसकी प्रतिक्रिया क्या होती हैक् आपके मना करने के बावजूद वह उसे छूना चाहता है, तब तक जब तक एक बार उसका हाथ उससे जल न जाए। जब तक उस लौ से उसका हाथ जलेगा नहीं, तब तक वह कोशिश करता रहेगा। एक बार हाथ जल जाने के बाद वह लौ से दूरी बना लेता है। किसी व्यक्ति की सफलता की राह में सबसे ब़डी बाधा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से असफल होने के भय का हावी रहना है।
सफलता और पिछ़डना एक ही संदर्भ में होते हैं। बस उसमें व्यक्ति, दिन, समय आदि का फर्क होता है। सफल लोगों में पिछ़ड जाने का भय कुछ कम होता है। पिछ़डने से डरना व्यक्ति की प्रवृत्ति होती है जो उसे आगे बढ़ने से रोकती है। लेकिन एक बार आप असफल हो गए तो फिर डर कैसाक् जिनके पास कुछ भी खोने को नहीं होता, वे डरते नहीं हैं। बस आपको अपने नजरिए में बदलाव लाना होगा। आप दुनिया में हर चीज को जानने की कोशिश करें, जरूरी नहीं कि आप जिंदगी में हर बात का जवाब पा ही लें। लेकिन आपको इस प्रक्रिया में लगे रहना चाहिए। जीवन में गंतव्य से ज्यादा यात्रा का महत्व है। अपनी जीवन यात्रा में चीजों को खोजने की प्रवृत्ति आपको बनाए रखनी चाहिए। मैंने जिंदगी में बहुत सारे काम किए हैं, पर योजनाबद्धता नहीं बना पाया है। मैं चीजों को खोजता हूं और जिसमें आनंद महसूस होता है, वह काम करता हूं। व्यक्ति को अपने भीतर से भय को निकाल कर अपने लिए सफलता की राह बनानी चाहिए और इसे केवल वह खुद ही कर सकता है।
कोई भी बाहरी मदद परिस्थिति को निकृष्ट बना देगी। महज इस किताब को पढ़ भर लेने से आप सफल नहीं हो सकते, न ही बाजार में बिकने वाली इस तरह की दूसरी किताबों को पढ़ने से ऎसा मुमकिन है। ऎसा मुमकिन है कि आप अपने आस-पास होने वाले घटनाक्रम पर पैनी निगाह रखें और बिना पिछ़डने के भय के आप सफलता की राह पर आगे बढ़ने की चेष्टा करें। आप विश्वास कीजिए कि इस तरीके से आप योजनाबद्ध ढंग से कार्य करते हुए हर सफलता पा सकते हैं, बस आपको अपने व्यवहार में थो़डा लचीलापन लाने की आवश्यकता है। व्यक्ति का नजरिया तीक्ष्ण ऊष्मा की तरह से काम करता है जो कि साधारण ऊष्मा से ज्यादा ताकतवर होती है। अपनी तीक्ष्ण ऊष्मा का इस्तेमाल करते हुए आप अपनी सफलता की कहानी खुद गढ़ सकने में सक्षम हो सकते हैं। इससे आप अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। अपने बदले हुए नजरिए का भरपूर आनंद लीजिए जो आपकी मौलिक संपत्ति है।
आपकी जिंदगी में कई झटके आएंगे, लेकिन झटकों से घबराने की जरूरत नहीं है। जब आप स़डक पर कार या बाइक चलाते हैं तो कई बार झटका लगता है, पर आप उसे नियंत्रित करते हैं। जिंदगी भी इसी तरह से है। जीवन के झटकों को अपने नजरिए से समायोजित करिए, तब देखिए कैसे सहज रूप से आपको जीवन का आनंद हासिल होगा।

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