जीवन में हर कवायद आराम को अधिकतम स्तर तक ले जाने की होती है। जिस प्रकार से हम जीवन जीते हैं और ब़डे घर एयरकंडीशन, आरामदायक कारें और अन्य चीजों पर हम खर्च करते हैं वह दर्शाता है कि हमारे अंदर इस ऎशो-आराम के लिए तीव्र इच्छा है।
वास्तव में लिखित इतिहास के शुरूआती समय से ही देखा गया है कि मुगल बादशाह कश्मीर एवं अन्य पह़ाडी जगहों से बर्फ मंगवाकर भीषण गर्मी के दिनों में भी आरामदायक स्थिति में जीते थे। परन्तु उन्हें भी अपने राज्य विस्तार के लिए इस आरामदायक स्थिति से बाहर निकलकर प्रयास करना प़डता था। जीवन में कुछ अच्छा प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि आप अपनी आरामदायक स्थिति से बाहर आएं। एक विद्यार्थी को परीक्षा में अच्छा नम्बर लाने के लिए क़डी मेहनत करनी प़डती है जबकि एक व्यवसायी अपने प्रतिद्वंदी को मात देने के लिए कई रातें जगता है या फिर एक खिल़ाडी को ओलंपिक की ऎसी प्रतियोगिता में जो एक मिनट भी नहीं जाएगी, पदक जीतने के लिए सालों पसीना बहाना प़डता है। कम शब्दों में कहें तो कोई भी महत्वपूर्ण चीज आरामदायक स्थिति में रहकर प्राप्त नहीं की जा सकती है। यदि आप कभी हार न मानने वाला दृष्टिकोण अपना लेते हैं तो सफलता की उस शिखर पर काबिज होंगे जिसके बारे में आपने सोचा भी न था।
मगर किसी भी ऊंचाई पर पहुंचने से पूर्व आप यह निर्धारित करें कि आपको कहां पहुंचना है। जब तक आप ये नहीं जानते कि आपको कहां जाना है, क्या करना है आप कैसे करेंगे। जब तक आपके पास कुछ करने को नहीं होगा, तब तक आप प्रेरित कैसे होंगेक् प्रोत्साहन एवं इच्छा के बगैर आप जो भी प्राप्त करना चाहते हैं, आप नहीं कर पाएंगे। प्रोत्साहन की कमी का कारण आपके अंदर इच्छा एवं इस विश्वास की कमी है कि आप ऎसा कर सकते हैं। कमजोर इच्छा का प्रतिफल भी कमजोर ही होना है।
प्रोत्साहन तो निष्ठा, दृढ़ विश्वास, प्रेरणा एवं इच्छा का मिश्रण है जो किसी भी काम को पूरा करने के लिए आवश्यक है। इन चीजों की गैर-मौजूदगी ही प्रोत्साहन की अनुपस्थिति का कारण होती है। अब लोग उम्रदराज हो जाते हैं जो उन्हें लगता है कि जीवन में जो पात्र था उन्होंने वो प्राप्त कर लिया और अब करते कुछ बचा नहीं है। यदि वे कुछ हासिल भी करना चाहते हैं तो अपने आप को असहाय महसूस करते हैं। हमेशा याद रखें कि अपने उद्देश्य प्राçप्त के लिए स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है।
हमारा शरीर ही हमारे लक्ष्य प्राçप्त का साधन है। कभी-कभी एक बीमार व्यक्ति स्वयं भोजन नहीं कर सकता है। यदि शरीर काम करता है तो दिमाग भी चलता है अन्यथा एक बीमार व्यक्ति को सारी दुनिया बेकार लगती है। बीमारी के दौरान उसकी प्राथमिकता स्वस्थ होने की ऎसी है न कि किसी लक्ष्य प्राçप्त की। इस आधुनिक, युग में ऎसा देखा जाता है कि भागमभाग एवं काम के दबाव का पहला शिकार कसरत होती है जो स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है। वास्तव में ऎसा नहीं होना चाहिए। यदि आप जीवन में अपनी छाप छो़डना चाहते हैं तो स्वस्थ रहना होगा ताकि आप सफलता के लिए बारम्बार प्रयास कर सकें। किसी भी ऎसे डर को पैदा न होने दे जो आपको रोकती है कि ये सही समय नहीं है। हर क्षण सही एवं शुभ है। बस इसकी आवश्यकता है कि एक बार उद्देश्य बनाकर मैदान में कूदा जाये।
यदि आप प्रयास ही नहीं करेंगे तो सफलता की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। इसके लिए आपको उचित समय पर उचित रवैया एवं व्यवहार विकसित करना होगा। हमें अपने दिमाग को इस भांति प्रशिक्षित करना चाहिए कि वह हर उस चीज को बाहर करे जो हमारे लिए आवश्यक नहीं है। हमारा लक्ष्य हमारे दिमाग में स्वत: होना चाहिए। यदि आप ऎसा करते हैं तो लक्ष्य प्राçप्त से आपको कोई रोक नहीं सकता है।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड बुक्स प्रा.लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक "सफलता का जादू" से साभार)
वास्तव में लिखित इतिहास के शुरूआती समय से ही देखा गया है कि मुगल बादशाह कश्मीर एवं अन्य पह़ाडी जगहों से बर्फ मंगवाकर भीषण गर्मी के दिनों में भी आरामदायक स्थिति में जीते थे। परन्तु उन्हें भी अपने राज्य विस्तार के लिए इस आरामदायक स्थिति से बाहर निकलकर प्रयास करना प़डता था। जीवन में कुछ अच्छा प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि आप अपनी आरामदायक स्थिति से बाहर आएं। एक विद्यार्थी को परीक्षा में अच्छा नम्बर लाने के लिए क़डी मेहनत करनी प़डती है जबकि एक व्यवसायी अपने प्रतिद्वंदी को मात देने के लिए कई रातें जगता है या फिर एक खिल़ाडी को ओलंपिक की ऎसी प्रतियोगिता में जो एक मिनट भी नहीं जाएगी, पदक जीतने के लिए सालों पसीना बहाना प़डता है। कम शब्दों में कहें तो कोई भी महत्वपूर्ण चीज आरामदायक स्थिति में रहकर प्राप्त नहीं की जा सकती है। यदि आप कभी हार न मानने वाला दृष्टिकोण अपना लेते हैं तो सफलता की उस शिखर पर काबिज होंगे जिसके बारे में आपने सोचा भी न था।
मगर किसी भी ऊंचाई पर पहुंचने से पूर्व आप यह निर्धारित करें कि आपको कहां पहुंचना है। जब तक आप ये नहीं जानते कि आपको कहां जाना है, क्या करना है आप कैसे करेंगे। जब तक आपके पास कुछ करने को नहीं होगा, तब तक आप प्रेरित कैसे होंगेक् प्रोत्साहन एवं इच्छा के बगैर आप जो भी प्राप्त करना चाहते हैं, आप नहीं कर पाएंगे। प्रोत्साहन की कमी का कारण आपके अंदर इच्छा एवं इस विश्वास की कमी है कि आप ऎसा कर सकते हैं। कमजोर इच्छा का प्रतिफल भी कमजोर ही होना है।
प्रोत्साहन तो निष्ठा, दृढ़ विश्वास, प्रेरणा एवं इच्छा का मिश्रण है जो किसी भी काम को पूरा करने के लिए आवश्यक है। इन चीजों की गैर-मौजूदगी ही प्रोत्साहन की अनुपस्थिति का कारण होती है। अब लोग उम्रदराज हो जाते हैं जो उन्हें लगता है कि जीवन में जो पात्र था उन्होंने वो प्राप्त कर लिया और अब करते कुछ बचा नहीं है। यदि वे कुछ हासिल भी करना चाहते हैं तो अपने आप को असहाय महसूस करते हैं। हमेशा याद रखें कि अपने उद्देश्य प्राçप्त के लिए स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है।
हमारा शरीर ही हमारे लक्ष्य प्राçप्त का साधन है। कभी-कभी एक बीमार व्यक्ति स्वयं भोजन नहीं कर सकता है। यदि शरीर काम करता है तो दिमाग भी चलता है अन्यथा एक बीमार व्यक्ति को सारी दुनिया बेकार लगती है। बीमारी के दौरान उसकी प्राथमिकता स्वस्थ होने की ऎसी है न कि किसी लक्ष्य प्राçप्त की। इस आधुनिक, युग में ऎसा देखा जाता है कि भागमभाग एवं काम के दबाव का पहला शिकार कसरत होती है जो स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है। वास्तव में ऎसा नहीं होना चाहिए। यदि आप जीवन में अपनी छाप छो़डना चाहते हैं तो स्वस्थ रहना होगा ताकि आप सफलता के लिए बारम्बार प्रयास कर सकें। किसी भी ऎसे डर को पैदा न होने दे जो आपको रोकती है कि ये सही समय नहीं है। हर क्षण सही एवं शुभ है। बस इसकी आवश्यकता है कि एक बार उद्देश्य बनाकर मैदान में कूदा जाये।
यदि आप प्रयास ही नहीं करेंगे तो सफलता की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। इसके लिए आपको उचित समय पर उचित रवैया एवं व्यवहार विकसित करना होगा। हमें अपने दिमाग को इस भांति प्रशिक्षित करना चाहिए कि वह हर उस चीज को बाहर करे जो हमारे लिए आवश्यक नहीं है। हमारा लक्ष्य हमारे दिमाग में स्वत: होना चाहिए। यदि आप ऎसा करते हैं तो लक्ष्य प्राçप्त से आपको कोई रोक नहीं सकता है।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड बुक्स प्रा.लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक "सफलता का जादू" से साभार)
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